Stotrarnava /58
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<ignore>१२
श्रीगणेशस्तोत्रेषु
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<verse>नमस्ते सिद्धिलक्ष्मीश गणाधिप महाप्रभो ।
विघ्नेश्वर जगन्नाथ गौरीपुत्र जगत्प्रभो ॥ २ ॥
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<verse>जय विघ्नेश्वर विभो विनायक महेश्वर ।
लम्बोदर महाबाहो सर्वदा त्वं प्रसीद मे ॥ ३॥
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<verse>महादेव जगत्स्वामिन् मूषिकारूढ शङ्कर ।
विशालाक्ष महाकाय मां त्राहि परमेश्वर ॥ ४ ॥
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<verse>कुञ्जरास्य सुराधीश महेश करुणानिधे ।
दशबाहो महाराज गजवक्त्र चतुर्भुज ॥ ५ ॥
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<verse>शूर्पकर्ण महाकर्ण गणनाथ प्रसीद मे ।
मातुलुङ्गधर स्वामिन् गदाचक्रसमन्वित ॥ ६ ॥
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<verse>शङ्खशूलसमायुक्त बीजापूरसमन्वित ।
इक्षुकार्मुकसंयुक्त पद्महस्त प्रसीद मे ॥ ७ ॥
</verse>
<verse>नानाभरणसंयुक्त रत्नकुम्भकर प्रभो ।
सर्गस्थितिलयाधीश परमात्मन् जय प्रभो ॥ ८ ॥
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<verse>अनाथनाथ विश्वेश विघ्नसङ्घविनाशन ।
त्रयीमूर्ते सुरपते ब्रह्मविष्णुशिवात्मक ॥ ९ ॥
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<verse>त्रयीगुण महादेव पाहि मां सर्वपालक ।
अणिमादिगुणाधार लक्ष्मी<delete>श्री </delete><add>[भू ] </add>विष्णुपूजित ॥ १० ॥
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<verse>गौरीशङ्करसंपूज्य जय त्वं गणनायक ।
रतिमन्मथसंसेव्य मही भूदार संस्तुत ॥। ११ ॥
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<verse><delete>रिध्या</delete><add>[ऋद्ध्या]</add>मोदादिसंसेव्य महागणपते जय ।
शङ्खपद्मादिसंसेव्य निरालम्ब निरीश्वर ॥ १२ ॥
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<verse>निष्कलङ्क निराधार पाहि मां नित्यमव्यय ।
अनाद्य जगतामाद्य पितामहसुपूजित ॥ १३ ॥
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<verse>धूमकेतो गणाध्यक्ष महामूषकवाहन ।
अनन्तपरमानन्द जय विघ्नेश्वरेश्वर ॥ १४ ॥
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<verse>रत्नसिंहासनासीन किरीटेन सुशोभित ।
परात्पर परेशान परपुपूरुष पाहि माम् ॥ १५ ॥
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<ignore>१२
<verse>नमस्ते सिद्धिलक्ष्मीश गणाधिप महाप्रभो ।
विघ्नेश्वर जगन्नाथ गौरीपुत्र जगत्प्रभो ॥ २ ॥
<verse>जय विघ्नेश्वर विभो विनायक महेश्वर ।
लम्बोदर महाबाहो सर्वदा त्वं प्रसीद मे ॥ ३॥
<verse>महादेव जगत्स्वामिन् मूषिकारूढ शङ्कर ।
विशालाक्ष महाकाय मां त्राहि परमेश्वर ॥ ४ ॥
<verse>कुञ्जरास्य सुराधीश महेश करुणानिधे ।
दशबाहो महाराज गजवक्त्र चतुर्भुज ॥ ५ ॥
<verse>शूर्पकर्ण महाकर्ण गणनाथ प्रसीद मे ।
मातुलुङ्गधर स्वामिन् गदाचक्रसमन्वित ॥ ६ ॥
<verse>शङ्खशूलसमायुक्त बीजापूरसमन्वित ।
इक्षुकार्मुकसंयुक्त पद्महस्त प्रसीद मे ॥ ७ ॥
<verse>नानाभरणसंयुक्त रत्नकुम्भकर प्रभो ।
सर्गस्थितिलयाधीश परमात्मन् जय प्रभो ॥ ८ ॥
<verse>अनाथनाथ विश्वेश विघ्नसङ्घविनाशन ।
त्रयीमूर्ते सुरपते ब्रह्मविष्णुशिवात्मक ॥ ९ ॥
<verse>त्रयीगुण महादेव पाहि मां सर्वपालक ।
अणिमादिगुणाधार लक्ष्मी<delete>श्री
<verse>गौरीशङ्करसंपूज्य जय त्वं गणनायक ।
रतिमन्मथसंसेव्य मही
<verse><delete>रिध्या</delete><add>[ऋद्ध्या]</add>मोदादिसंसेव्य महागणपते जय ।
शङ्खपद्मादिसंसेव्य निरालम्ब निरीश्वर ॥ १२ ॥
<verse>निष्कलङ्क निराधार पाहि मां नित्यमव्यय ।
अनाद्य जगतामाद्य पितामहसुपूजित ॥ १३ ॥
<verse>धूमकेतो गणाध्यक्ष महामूषकवाहन ।
अनन्तपरमानन्द जय विघ्नेश्वरेश्वर ॥ १४ ॥
<verse>रत्नसिंहासनासीन किरीटेन सुशोभित ।
परात्पर परेशान पर
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