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१२
 
श्रीगणेशस्तोत्रेषु
 
नमस्ते सिद्धिलक्ष्मीश गणाधिप महाप्रभो ।
विघ्नेश्वर जगन्नाथ गौरीपुत्र जगत्प्रभो ॥ २ ॥
 
जय विघ्नेश्वर विभो विनायक महेश्वर ।
लम्बोदर महाबाहो सर्वदा त्वं प्रसीद मे ॥ ३॥
 
महादेव जगत्स्वामिन् मूषिकारूढ शङ्कर ।
विशालाक्ष महाकाय मां त्राहि परमेश्वर ॥ ४ ॥
 
कुञ्जरास्य सुराधीश महेश करुणानिधे ।
दशबाहो महाराज गजवक्त्र चतुर्भुज ॥ ५ ॥
 
शूर्पकर्ण महाकर्ण गणनाथ प्रसीद मे ।
मातुलुङ्गधर स्वामिन् गदाचक्रसमन्वित ॥ ६ ॥
 
शङ्खशूलसमायुक्त बीजापूरसमन्वित ।
 
इक्षुकार्मुकसंयुक्त पद्महस्त प्रसीद मे ॥ ७ ॥
 
नानाभरणसंयुक्त रत्नकुम्भकर प्रभो ।
 
सर्गस्थितिलयाधीश परमात्मन् जय प्रभो ॥ ८ ॥
 
अनाथनाथ विश्वेश विघ्नसङ्घविनाशन ।
त्रयीमूर्ते सुरपते ब्रह्मविष्णुशिवात्मक ॥ ९ ॥
 
त्रयीगुण महादेव पाहि मां सर्वपालक ।
अणिमादिगुणाधार लक्ष्मीश्री [भू ] विष्णुपूजित ॥ १० ॥
 
गौरीशङ्करसंपूज्य जय त्वं गणनायक ।
रतिमन्मथसंसेव्य मही भूदार संस्तुत ॥। ११ ॥
 
रिध्या[ऋद्ध्या]मोदादिसंसेव्य महागणपते जय ।
शङ्खपद्मादिसंसेव्य निरालम्ब निरीश्वर ॥ १२ ॥
 
निष्कलङ्क निराधार पाहि मां नित्यमव्यय ।
अनाद्य जगतामाद्य पितामहसुपूजित ॥ १३ ॥
 
धूमकेतो गणाध्यक्ष महामूषकवाहन ।
अनन्तपरमानन्द जय विघ्नेश्वरेश्वर ॥ १४ ॥
 
रत्नसिंहासनासीन किरीटेन सुशोभित ।
 
परात्पर परेशान परपुरुष पाहि माम् ॥ १५ ॥