Proofing

2026-04-06 04:48:50 by akprasad

This page has been fully proofread once and needs a second look.

<page>
<ignore>
श्रीचिदम्बरेशस्तुतिः
 
१०९
 
</ignore>
<verse>
मृकण्डुसुतचण्डतरदण्डधरलुण्ठनपरं हृदयमण्डपरशुं

शिखण्डशशिखण्डमणिमण्डनपरं वरचिदम्बरनटं हृदि भजे ॥ १० ॥
 
</verse>
<verse>
भस्मानि पान्तु परमेश्वरदिव्य देह-
 

सम्पर्क सौरभ पवित्रकराणि चास्मान् ।

रोगारिपापभय <ellipsis>. . . . . . </ellipsis>?
 

रक्षाकराण्यखिललोकवशीकराणि ॥ ११ ॥
</verse>
<trailer text="34_END">
॥ इति श्रीचिदम्बरनटनं सम्पूर्णम् ॥
 
</trailer>
<footnote text="35_START">
३५. ॥ अथ श्रीचिदम्बराष्टकम् ' ॥
 
<ref>1</ref> ॥</footnote>
<verse>
चित्तजान्तकं चित्स्वरूपिणं चन्द्रमृगधरं <delete>चर्मप्रिय </delete><add>[ चर्मभी ] </add>करम् ।

चतुरभाषणं चिन्मयं गुरुं भज चिदम्बरं भावना स्थितम् ॥ १ ॥
</verse>
<verse>
दक्षमर्दनं दैवशासनं द्विजहिते रतं दोषभञ्जनम् ।

दुःखनाशनं दुरितशासनं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ २ ॥
</verse>
<verse>
बद्धपञ्चकं बहुलशोभित बुधवरैर्नृतं भस्मभूषितम् ।

भावयुक्स्तुतं बन्धुभिः स्तुतं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ३ ॥
</verse>
<verse>
दीनतत्परं दिव्यवचनदं <delete>दी </delete><add>[र] </add>क्षितापदं दिव्यतेजसम् ।

दीर्घशोभितं देहतत्त्वदं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ४ ॥
 
</verse>
<verse>
क्षितितलोद्भवं क्षेमसंभवं क्षीणमानवं क्षिप्रसद्यवम् ।

क्षेमदात्रवं क्षेत्रगौरवं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ५ ॥
 
</verse>
<verse>
तक्षभूषणं तत्त्वसाक्षिणं यक्षसागणं भिक्षुरूपिणम् ।

भस्मपोषणं व्यक्तरूपिणं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ६ ॥
</verse>
<verse>
यस्तु जापिकं चिदम्बराष्टकं पठति नित्यकं पापहं सुखम् ।

कठिनतारकं घटकुलाधिकं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ७ ॥
</verse>
<trailer text="35_END">
॥ इति श्रीचिदम्बराष्टकं सम्पूर्णम् ॥
 
</trailer>
<title text="36_START">
३६. ॥ अथ श्रीचिदम्बरेशस्तुतिः ॥
 
</title>
<verse>
कल्याणमूर्तिं कनकाद्रिचापं
 

कान्तासमाक्रान्त निजार्धदेहम् ।
 

कालान्तकं कामरिपुं पुरारिं
 

चिदम्बरेशं हृदि भावयामि ॥ १ ॥
 
</verse>
<footnote>
1.
 
सप्तैव श्लोकाः मातृकायां सन्ति ।
 
</footnote>
</page>