Stotrarnava /155
This page has been fully proofread once and needs a second look.
<page>
<ignore>श्रीचिदम्बरेशस्तुतिः
१०९
</ignore>
<verse>मृकण्डुसुतचण्डतरदण्डधरलुण्ठनपरं हृदयमण्डपरशुं
शिखण्डशशिखण्डमणिमण्डनपरं वरचिदम्बरनटं हृदि भजे ॥ १० ॥
</verse>
<verse>भस्मानि पान्तु परमेश्वरदिव्य देह-
सम्पर्क सौरभ पवित्रकराणि चास्मान् ।
रोगारिपापभय <ellipsis>. . . . . . </ellipsis>?
रक्षाकराण्यखिललोकवशीकराणि ॥ ११ ॥
</verse>
<trailer text="34_END">॥ इति श्रीचिदम्बरनटनं सम्पूर्णम् ॥
</trailer>
<footnote text="35_START">३५. ॥ अथ श्रीचिदम्बराष्टकम् ' ॥
<ref>1</ref> ॥</footnote>
<verse>चित्तजान्तकं चित्स्वरूपिणं चन्द्रमृगधरं <delete>चर्मप्रिय </delete><add>[ चर्मभी ] </add>करम् ।
चतुरभाषणं चिन्मयं गुरुं भज चिदम्बरं भावना स्थितम् ॥ १ ॥
</verse>
<verse>दक्षमर्दनं दैवशासनं द्विजहिते रतं दोषभञ्जनम् ।
दुःखनाशनं दुरितशासनं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ २ ॥
</verse>
<verse>बद्धपञ्चकं बहुलशोभित बुधवरैर्नृतं भस्मभूषितम् ।
भावयुक्स्तुतं बन्धुभिः स्तुतं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ३ ॥
</verse>
<verse>दीनतत्परं दिव्यवचनदं <delete>दी </delete><add>[र] </add>क्षितापदं दिव्यतेजसम् ।
दीर्घशोभितं देहतत्त्वदं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ४ ॥
</verse>
<verse>क्षितितलोद्भवं क्षेमसंभवं क्षीणमानवं क्षिप्रसद्यवम् ।
क्षेमदात्रवं क्षेत्रगौरवं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ५ ॥
</verse>
<verse>तक्षभूषणं तत्त्वसाक्षिणं यक्षसागणं भिक्षुरूपिणम् ।
भस्मपोषणं व्यक्तरूपिणं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ६ ॥
</verse>
<verse>यस्तु जापिकं चिदम्बराष्टकं पठति नित्यकं पापहं सुखम् ।
कठिनतारकं घटकुलाधिकं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ७ ॥
</verse>
<trailer text="35_END">॥ इति श्रीचिदम्बराष्टकं सम्पूर्णम् ॥
</trailer>
<title text="36_START">३६. ॥ अथ श्रीचिदम्बरेशस्तुतिः ॥
</title>
<verse>कल्याणमूर्तिं कनकाद्रिचापं
कान्तासमाक्रान्त निजार्धदेहम् ।
कालान्तकं कामरिपुं पुरारिं
चिदम्बरेशं हृदि भावयामि ॥ १ ॥
</verse>
<footnote>1.
सप्तैव श्लोकाः मातृकायां सन्ति ।
</footnote>
</page>
<ignore>श्रीचिदम्बरेशस्तुतिः
<verse>मृकण्डुसुतचण्डतरदण्डधरलुण्ठनपरं हृदयमण्डपरशुं
शिखण्डशशिखण्डमणिमण्डनपरं वरचिदम्बरनटं हृदि भजे ॥ १० ॥
<verse>भस्मानि पान्तु परमेश्वरदिव्य
सम्पर्क
रोगारिपापभय <ellipsis>. . . . . . </ellipsis>?
रक्षाकराण्यखिललोकवशीकराणि ॥ ११ ॥
<trailer text="34_END">॥ इति श्रीचिदम्बरनटनं सम्पूर्णम् ॥
<footnote text="35_START">३५. ॥ अथ श्रीचिदम्बराष्टकम्
<verse>चित्तजान्तकं चित्स्वरूपिणं चन्द्रमृगधरं <delete>चर्मप्रिय
चतुरभाषणं चिन्मयं गुरुं भज चिदम्बरं भावना
<verse>दक्षमर्दनं दैवशासनं द्विजहिते रतं दोषभञ्जनम् ।
दुःखनाशनं दुरितशासनं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ २ ॥
<verse>बद्धपञ्चकं बहुलशोभित बुधवरैर्नृतं भस्मभूषितम् ।
भावयुक्स्तुतं बन्धुभिः स्तुतं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ३ ॥
<verse>दीनतत्परं दिव्यवचनदं <delete>दी
दीर्घशोभितं देहतत्त्वदं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ४ ॥
<verse>क्षितितलोद्भवं क्षेमसंभवं क्षीणमानवं क्षिप्रसद्यवम् ।
क्षेमदात्रवं क्षेत्रगौरवं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ५ ॥
<verse>तक्षभूषणं तत्त्वसाक्षिणं यक्षसागणं भिक्षुरूपिणम् ।
भस्मपोषणं व्यक्तरूपिणं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ६ ॥
<verse>यस्तु जापिकं चिदम्बराष्टकं पठति नित्यकं पापहं सुखम् ।
कठिनतारकं घटकुलाधिकं भज चिदम्बरं भावनास्थितम् ॥ ७ ॥
<trailer text="35_END">॥ इति श्रीचिदम्बराष्टकं सम्पूर्णम् ॥
<title text="36_START">३६. ॥ अथ श्रीचिदम्बरेशस्तुतिः ॥
<verse>कल्याणमूर्तिं कनकाद्रिचापं
कान्तासमाक्रान्त
कालान्तकं कामरिपुं पुरारिं
चिदम्बरेशं हृदि भावयामि ॥ १ ॥
<footnote>1.
</page>