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श्लोकानुक्रमणिका पृष्ठम्
 
पश्चादुच्चैर्भुजत
५५
पत्श्यामा दिनकर
 
१७८
पाण्डुच्छायोपवन
 
३८
पादन्यासक्णित
 
५४
पादा निन्दोरमृत
 
१३६
प्रत्यासन्ने नभसि
 
१०
प्रद्योतस्य प्रियदुहि
 
१७७
प्राप्यावन्तीनुदय
 
४६
प्रालेयाद्रेरुपतट.
 
८७
ब्रह्मावर्ते जनपद
७३
भर्तुः कण्ठच्छविरिति
५१
भर्तुमिंर्मित्रं प्रियमवि
१४५
भित्त्वा सद्यः किस
१५९
भूयश्चाह त्वमसि
 
१६७
मत्वा देहं धनपति
 
१०९
मन्दं मन्दं नुदति
 
१८
मन्दाकिन्याः सलिल
 
१८०
मार्गे तावच्छृणु
२५
मामाकाशप्रणिहि
१५७
यत्र स्त्रीणां प्रियतम
 
१०७
यत्रोन्मत्त भ्रमरमुख
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
पृष्ठम्
 
५५
१७९
यस्यां यक्षा: सितम
१०२
ये संरम्भोत्पत
 
न ८
रक्ताशोकश्लकिस
 
११
रत्नच्छाया व्यतिकर
 
१३६
२८
रुद्धापाङ्ड़्गप्रसर
 
१४
 
४६
 
७३
 
१४५
 
१५९
 
१६७
 
१०९
 
१८
 
१८०
 
२५
 
१५७
 

वक्रः पन्थास्तव
 
४३
वापी चास्मिन्मर
 
११२
वामश्वाचास्याः कररुह
 
१४१
वासश्चित्रं मधु नयन
 
१८३
विद्युत्वन्तं ललित
 
९८
विश्रान्तः सन्त्व्रज
 
४१
वीचिक्षोभस्वनित
 
४३
वेणीभूतप्रतनु
 
४५
शब्दाख्येयं यदपि
 
१५२
शब्दायन्ते मधुरम
 
८६
शापान्ते मे भुजग
 
१६४
शेषान्मासान्विरह
 
१२९
श्यामास्वङ्गं चकित
 
१५३
संक्षिप्येत क्षण
 
१६१
संतप्तानां त्वमसि
 
१०७
 
१७९
१४
सव्यापारामहनि
 
१८७
 
पृष्ठम्
 
१०२
 
.८३
 
२८
 
१४०
 
११२
 
१४१
 
१८३
 
९८
 
४१
 
१५२
 
८६
 
१६४
 
१२९
 
१५३
 
१६१
 
१४
 
१३२