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MAHARISHI UNIVERSITY OF MANAGEMENT
 
VEDIC LITERATURE COLLECTION
 

 
३ २ ३ १ २
 
साम वेद
 
[Sāma Veda]
 
असि होता मनुर्हितः ४ १ ( रा )
 
२ ३२उ ३ २ ३१
 

 
३ १ २ ३
 

 
यदद्य सूर उदितेऽनागा मित्रो अर्यमा
 
१३५१
 
३ १ २
 
३ १ २र
 
सुवाति सविता भगः १
 
३ १२ ३ २उ ३ १
 
२र
 
१३५२ सुप्रावीरस्तु स क्षयः प्र नु यामन्त्सुदानवः
 
२ ३ १
 
२ ३ १२
 
ये नो अहोऽतिपिप्रति २
 
३२ ३ २ ३ १ २ ३१२
 
३ २ ३ २
 
उत स्वराजो अदितिरदब्धस्य व्रतस्य ये
 
१३५३
 
३ १
 
२र
 
महो राजान ईशते ३
 

 

 
२ (खि)
 
३ १
 
१३५४ उ॑ त्वा मन्दन्तु सोमाः कृणुष्वं राधौ श्रद्रिवः
 
१ २
 
३ १ २
 
अव ब्रह्मद्विषो जहि १
 
१३५५
 
३ २ ३ १२३ २ ३ १ २
 
३ १
 

 
पदा पणीनराधसो नि बाधस्व महा ँ असि
 
२उ
 
३ २३ १ २र
 
न हि त्वा कश्च न प्रति २
 
१ २
 
३ २ ३ २ ३ १ २र
 
१३५६ त्वमीशिषे सुतानामिन्द्र त्वमसुतानाम्
 
२उ
 
३ १ २
 
त्व ँ राजा जनानाम् ३ ३(ठि)
 
इति प्रथमः खण्डः
 
१३५७
 
१३५८
 

 

 
२र ३ १ २ ३ २ २ ३ १
 
२र
 
३ १ २
 
३ १२
 
आ जागृविर्विप्र ऋतं मतीना ँ सोमः पुनानो असदच्चमूषु
 
१२ ३ १ २ ३ २ ३ १ २
 
३ १ २
 
३ १ २ ३ १ २
 
सपन्ति यं मिथुनासो निकामा अध्वर्यवो रथिरासः सुहस्ताः १
 
१ २ ३२उ ३ २३ १ २३ १ २२ ३ १ २ ३ १
 
२र
 
स पुनान उप सूरे दधान प्रभे प्रा रोदसी वी ष प्रावः
 
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