2026-02-17 02:18:11 by akprasad
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<ignore>लाङ्गूलोपनिषत्
</ignore>
<ignore>२४५
</ignore>
<p>तिकज्वर-विषमज्वर-शीतज्वर-एकाहिकज्वर-द्वयाdvyAहिकज्वर- त्र्यैहिकज्वर-चातु -
-
र्थिकज्वर - -अर्धमासिकज्वर - -मासिकज्वर - -षाण्मासिकज्वर-सांवत्सरिकज्वर-अ-
स्थ्यन्तर्गतज्वर-महापस्मार - -श्रमिकापस्मारांश्च भेदय भेदय खादय खादय
ॐ ह्रां ह्रींहूंह्रूं हुं फट् घे घे स्वाहा ॥
</p>
<p>ॐ नमो भगवते चिन्तामणिहनुमते अङ्गशूल-अक्षिशूल-शिरश्शूल-
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गुल्मशूल - -उदरशूल - -कर्णशूल - -नेत्रशूल -गुदशूल-कटिशूल- जानुशूल- जङ्घाशूल - -ह -
-
स्तशूल-पादशूल-गुल्फशूल-वातशूल- पित्तशूल-पायुशूल-स्तनशूल परिणामशूल-
परिधामशूल परिबाणशूल - -दन्तशूल - -कुक्षिशूल सुमनश्शूल - -सर्वशूलानि निर्मूलय
निर्मूलय दैत्यदानवकामिनीवेतालब्रह्मराक्षसकोलाहलनागपाशानन्तवासुकि-
-
तक्षककार्कोटकलिङ्गपद्मककुमुदज्वलरोगपाशमहामारीन् कालपाशविषं निर्विषं
कुरु कुरु ॐ ह्रां ह्रींहुंह्रूं हुं फट् घे घे स्वाहा ॥
</p>
<p>ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ग्लां ग्लीं ग्लूं ॐ नमो भगवते पातालगरुडहनुमते
भैरववनगतगज सिंहेन्द्राक्षीपाशबन्धं छेदय छेदय प्रलयमारूत कालाग्नि-
हनुमन् शृङ्खलाबन्धं विमोक्षय विमोक्षय सर्वग्रहं छेदय छेदय मम सर्वका-
र्याणि साधय साधय मम प्रसादं कुरु कुरु मम प्रसन्न श्रीरामसेवक सिंह
भैरवस्वरूप मां रक्ष रक्ष ॐ ह्रां ह्रीं हूं ह्रां ह्रींरूं ह्रां क्ष्मों मैंमौं भ्रैं श्रां श्रीं क्लां क्लीं क्लीं
क्रां क्रीं ह्रां ह्रींहूं हैंह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्र:रः ह्रां ह्रीं हुं ख ख जय जय मारण मोहन
घूर्ण घूर्ण दम दम मारय मारय वारय वारय खे खे ह्रां ह्रींहूंह्रूं हुं फट्
घे घे स्वाहा ॥
</p>
<p merge-next="true">ॐ नमो भगवते कालाग्मिरौद्रहनुमते भ्रामय भ्रामय लव लव
कुरु कुरु जय जय हस हस मादय मादय प्रज्वलय प्रज्वलय मृडय मृडय
त्रासय त्रासय साहय साहय वशय वशय शामय शामय अस्त्र त्रिशूलडमरुखङ्ग-
ड्ग-
कालमृत्युकपालखटुाट्वाङ्गधर अभयशाश्वत हुं हुं अवतारय अवतारय हुं हुं
</p>
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<ignore>लाङ्गूलोपनिषत्
<ignore>२४५
<p>तिकज्वर-विषमज्वर-शीतज्वर-एकाहिकज्वर-
र्थिकज्वर
स्थ्यन्तर्गतज्वर-महापस्मार
ॐ ह्रां ह्रीं
<p>ॐ नमो भगवते चिन्तामणिहनुमते अङ्गशूल-अक्षिशूल-शिरश्शूल-
गुल्मशूल
स्तशूल-पादशूल-गुल्फशूल-वातशूल- पित्तशूल-पायुशूल-स्तनशूल परिणामशूल-
परिधामशूल परिबाणशूल
निर्मूलय दैत्यदानवकामिनीवेतालब्रह्मराक्षसकोलाहलनागपाशानन्तवासुकि-
-
कुरु कुरु ॐ ह्रां ह्रीं
<p>ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ग्लां ग्लीं ग्लूं ॐ नमो भगवते पातालगरुडहनुमते
भैरववनगतगज
हनुमन् शृङ्खलाबन्धं विमोक्षय विमोक्षय सर्वग्रहं छेदय छेदय मम सर्वका-
र्याणि साधय साधय मम प्रसादं कुरु कुरु मम प्रसन्न श्रीरामसेवक
भैरवस्वरूप मां रक्ष रक्ष ॐ ह्रां ह्रीं हूं ह्रां ह्
क्रां क्रीं ह्रां ह्रीं
घूर्ण घूर्ण दम दम मारय मारय वारय वारय खे खे ह्रां ह्रीं
घे घे स्वाहा ॥
<p merge-next="true">ॐ नमो भगवते कालाग्मिरौद्रहनुमते भ्रामय भ्रामय लव लव
कुरु कुरु जय जय हस हस मादय मादय प्रज्वलय प्रज्वलय मृडय मृडय
त्रासय त्रासय साहय साहय वशय वशय शामय शामय अस्त्र
कालमृत्युकपालख
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