This page has not been fully proofread.

2
 
गन्धर्व किन्नरादयस्तपडकेशभीता विजयत रे परिश्रान्तो
• भगवान, मुकुन्दो भांवत्तीरे (निविद्रियाय) नैर्ऋलो जले
निमग्नों मूर्च्छितोऽयमग्निस्सलिलगतः पश्यत रे न पैश्यामः
चिरादश्विनाविति क्रोशन्तः सव्याज ससंभ्रम प्रचाराः कथ-
श्चित्तपःदेशादुत्तीर्णाः। एवमेव देवगणैस्सह गणनाव्यामृत-
भुजचतुष्टमीवर्जित पाञ्चजन्मसुदर्शना दिर्हति मण्डलपरिवृते
परितोऽपि सैरस्तीरकुण्डलितभोगकुण्डलीश्वरोपरि विस्तार्य
माणफणासहस्र प्रच्छायवासिनि सेविनयवैनतेयचालित-
चामशनिलनिर्मृष्ट निरन्तरमन्त्र पाठ कन्द लितमुखारविन्द-
स्वेदवारिणि वॉरिनिमग्नवक्षस्तटसरभ सोत्तिष्ठदिन्दिरागदा-
श्लिष्टपुलकितकण्ठन्ले लक्ष्णतानाहत पीताम्बरान्वितकटि-
भागे भगवति लवमानवनमालाधरे दामोदरे तपस्थति सति
 
10
 
2. M - अपश्नितान्तो
2. A, T. धावत रे
 
5
 
3. This is the emended reading
An miss, have निभाय
4. M. वश्याम:
 
0
 
ङ. T-
पञ्चजन्य
 
6. A,M हेतु"
7. AM - अपकृतो. पि
 
13
 
8. A.M. संरक्षित
 
9. A विनय वैनतेय
 
टेल - विनयेन ते
10. M - दृष्ट
 
0
 
0
 
0
 
11. M. पाठक
 
12. M- धारि... निमग्न
 
13. A omits तिष्ठ
14. (A.M. गाथालिष्ठ
होगामगाश्लिष्ट
 

 
37