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५७२
छान्दोग्योपनिषन्मन्त्र-
पृष्ठम्
पृष्ठम्
स यो विज्ञानं ब्रह्मेत्युपास्ते४३४ स ह हारिद्रुमतं गौतम ० २२०
सर्वे खल्विदं ब्रह्म
१७३
सहाशाथ हैनमुपससाद ३७०
सर्वकर्मा सर्वकामः
१७७
स हेभ्यं कुल्माषान्खा ० ६४
सर्वास्वप्सु पञ्चविध
९०
स होवाच किं मेऽन्नं
२६८
सर्वे स्वरा इन्द्रस्या ०
११८
स होवाच किं मे वासो
२६९
सर्वे स्व घोषवतो
११९
स होवाच भगवन्तं
७०
स वा एष आत्मा हृदि
४८६
स होवाच महात्मनश्च ०
२१५
स समित्पाणिः पुनरेयाय ५२०
स होवाच विजानाम्यहं
२३५
५२४
"
"
साह वागुच्चक्राम
२६२
५२७
सा हैनमुवाच नाहमे ०
२१९
"
35
स ह क्षत्तान्विष्य ना०
२०८
सेयं देवतैक्षत
३५३
स ह खादित्वाति•
६६
सैषा
चतुष्पदा षडिधा
१६२
सह. गौतम रा
२७९
सोऽधस्ताच्छकटस्य
२०८
स ह द्वादशवर्ष उपेत्य
३३६
सोऽहं भगवो मन्त्रविदे० ४१७
स ह पञ्चदशाहानि
३६९
स्तेनो हिरण्यस्य सुरां ३०९
संह प्रातः संजिहान
६६
स्मरो वावाकाशाद्भूयस्त० ४४५
स ह व्याधिनानशितुं
२३४
ह
सह शिलक
५६
हसस्ते पादं वक्तेति
२२७
स ह संपादयांचकार
३१२
हन्ताहमेतद्भगवत्तो
५९.
छान्दोग्योपनिषन्मन्त्र-
पृष्ठम्
पृष्ठम्
स यो विज्ञानं ब्रह्मेत्युपास्ते४३४ स ह हारिद्रुमतं गौतम ० २२०
सर्वे खल्विदं ब्रह्म
१७३
सहाशाथ हैनमुपससाद ३७०
सर्वकर्मा सर्वकामः
१७७
स हेभ्यं कुल्माषान्खा ० ६४
सर्वास्वप्सु पञ्चविध
९०
स होवाच किं मेऽन्नं
२६८
सर्वे स्वरा इन्द्रस्या ०
११८
स होवाच किं मे वासो
२६९
सर्वे स्व घोषवतो
११९
स होवाच भगवन्तं
७०
स वा एष आत्मा हृदि
४८६
स होवाच महात्मनश्च ०
२१५
स समित्पाणिः पुनरेयाय ५२०
स होवाच विजानाम्यहं
२३५
५२४
"
"
साह वागुच्चक्राम
२६२
५२७
सा हैनमुवाच नाहमे ०
२१९
"
35
स ह क्षत्तान्विष्य ना०
२०८
सेयं देवतैक्षत
३५३
स ह खादित्वाति•
६६
सैषा
चतुष्पदा षडिधा
१६२
सह. गौतम रा
२७९
सोऽधस्ताच्छकटस्य
२०८
स ह द्वादशवर्ष उपेत्य
३३६
सोऽहं भगवो मन्त्रविदे० ४१७
स ह पञ्चदशाहानि
३६९
स्तेनो हिरण्यस्य सुरां ३०९
संह प्रातः संजिहान
६६
स्मरो वावाकाशाद्भूयस्त० ४४५
स ह व्याधिनानशितुं
२३४
ह
सह शिलक
५६
हसस्ते पादं वक्तेति
२२७
स ह संपादयांचकार
३१२
हन्ताहमेतद्भगवत्तो
५९.