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२६३
 
५०
 
२७६
 
५७०
 
छान्दोग्योपनिषन्मन्त्र-
 
श्रुत५ ह्येव मे: भगवद्दृशे० २३२
 
श्रोत्र हच्चिक्राम
 
श्रोत्रमेव ब्रह्मणश्चतुर्थः. १९४
 
श्रोत्रमेवनः साम
श्वेतकेतुर्दारुणेयः.
 
पृष्ठम्..
 
स. ब्रूयान्नास्य जरयैत० . . ४७६
 
समस्तस्य खलु साम्न
 
८३
 
समान उ एवायं
 
३.०
 
समाने तृप्यति मन०
 
..३.२९
 
सय आकाशं ब्रह्मेत्यु० ४४४
 
३३५.
 
स य आशां ब्रह्मेत्युपास्त ४४८
 
"
 
,,
 
श्वेतकेतो यन्नु सोम्येदं
 
३३७
 
स य इदमविद्वानग्नि०
 
३३०
 

 
स य एतदेवं विद्वान •
 
३९
 
षोडशकलः सोम्य
 
३६८
 

 
स य एतदेवं विद्वान्साधु० ८५
 
स य एतदेवममृतं वेद १४९
 
संकल्पो वाव मनतो
 
४२५
 
.,१५१
 
स. एतां त्रयीं विद्याम ०
 
२५२
 
"
 
"
 
. . १५२
 
स एतास्तिस्रो देवता
 
२५२
 
१५४
 
"
 
स एवमेतद्गायत्रं
 
१०४
 
"
 
33
 
- १५५
 
• स एवाधस्तात्स उपरि० ४६२
 
स य एतमेवं विद्वाश्च० २२४
 
स एष परोवरीयानुद्गी
 
० ६२
 
२२६
 
"
 
"
 
- स एष ये चैतस्माद • ५२
 
स एष रसानाং‍
 
स जातो यावदायुषं
 

 
सत्यकामो ह जावालो ...
 
२१९
 
93
 
२२८
 
"
 
११
 
२९१
 
"
 
२३०
 
. स य एतमेवं विद्वाना० : १९९
 
• सदेव सोम्येदमग्र
 
. ३४१
 
स य एतमेवं विद्वानुपारते. २३८
 
२४०
 
"