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वर्णानुक्रमणिका ।
 
५६९
 
पृष्टम्
 
यद्वै तत्पुरुषे शरीरमिदं १६१ लो३कद्वारंमपावा३र्णू
 
पृष्ठम्
 
१३४
 
यद्वै तद्ब्रह्मेतीदं
यस्तद्वेद स वेद
 
१६३
 
"
 
"
 
१३२
 
११६
 
"
 
"
 
.१३५
 
यस्यामृचि तामृचं
 
. ३५ लोकेषु पञ्चविध*
 
८६
 
यां दिशमभिष्टशेष्य •
 
३६
 
लोम हिंकारस्त्वक्प्रस्तावो ११३
 
या वाक्सतस्माद •
 
३१
 

 
यावान्वा अयमाकाश ० ४७४ वर्षति हास्मै
 
८९
 
या
 
वै
 
सा गायत्रीयं
 
१६०
 
वसन्तो हिंकारो
 
११०
 
या
 
वै सापृथिवीयं
 
१६१
 
वसिष्ठाय स्वाहेत्यग्ना •
 
२७२
 
येन च्छन्दसा
 
३५
 
वागेव ब्रह्मणश्चतुर्थः
 
१९३
 
यो वै भूमा तत्सुखं
 
४५८
 
वांगेवर्प्राणः
 
१३
 
योषा वाव गोतमाग्नि०
 
२८८
 
वाग्वाव नाम्नो भूयसी
 
४२१..
 
यो ह वा आयतनं
 
२६१
 
वायुर्वाव संवर्गों
 
२१३
 
यो ह वै ज्येष्ठं च श्रेष्ठं च २५९
 
विज्ञानं वाव ध्यानाद्भूयो ४३३
 
यो ह वै प्रतिष्ठां वेद
 
.
 
२६० विनर्दि साम्नो वृणे
 
११७
 
यो ह वै वसिष्ठं वेद
 
२६० दृष्टौ पञ्चविध‍
 
८९
 
यो ह वै संपदं वेद
 
२६१
 
वेत्थ यथासौ लोको
 
२७७
 
वेत्थ यदितोऽधि
 
२७६
 

 
रैक्केमानि षट्शतानि
 
२०.९ व्याने तृप्यति श्रोत्रं
 
३२८
 

 

 
लवणमेतदुदकेऽवधायाथ ३९६ श्यामाच्छबलं प्रपद्ये
 
५४७