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५६८
 
छान्दोग्योपनिषन्मन्त्र-
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
मघवन्मयै वा इद
 
५३०
 
यथामानमाखणमृत्वा
 
२४
 
मटचीहतेषु कुरुष्वा •
 
૬૪
 
यथा सोम्य पुरुषं
 
३९९
 
मदुष्ट पादं वक्तेति
 
२२९
 
यथा सोम्य मधु मधुकृतो ३८६
 
मनो ब्रह्मेत्युपासी०
 
१९२
 
यथा: सोम्यैकेन..
 
३३७
 
मनोमयः प्राणशरीरो
 
१७४
 
यथा सोम्यैकेन नखनि०
 
३३९
 
मनो वाव वाचो भूयो
 
४२३
 
यथा सोम्यैकेन लोह ०
 
३३८
 
मनो हिंकारो
 
१०४ यथेह क्षुधिता बाला
 
३३२
 
मनो होच्चक्राम
 
२६३
 
यदग्ने रोहित रूपं
 
३५७
 
मानवो ब्रह्मैवैक ०
 
२५५
 
यदादित्यस्य रोहित‍
 
.
 
३५८
 
मासेभ्यः पितृलोकं
 
२९८
 
यदाप उच्छुष्यन्ति
 
२१४
 
मासेभ्यः संवत्सर৺
 
२९२
 
यदा वा ऋचमाप्नोο
 
३९
 

 
यदा वै करोत्यथ
 
.४५७
 
यं यमन्तमभिकामो
 
४८३
 
यदा वै निस्तिष्ठत्यथ
 
.
 
.४५६
 
य आत्मापहतपाप्मा
 
५०६
 
यदा वै मनुतेऽथ
 
४५५
 
य एष स्वप्ने महीयमान ० ५२३
 
यदा वै विजानात्यथ
 
४५४
 
य एषोऽक्षिणि पुरुषो
 
यच्चन्द्रमसो रोहित
 
२४४
 
यदा वै
 
श्रद्दाधात्यथ
 
४५६
 
३५८
 
यदा वै सुखं लभतेऽथ ४५७
 
४५९
 
९५
 
यत्र नान्यत्पश्यति
 
यथा कृतायविजिताया० २०५
 
"
 
7.9.
 
यदुदिति स उद्गीथो...
यदु रोहितमिवाभूदिति ३६१
 
२०७
 
यद्धविज्ञातमिवाभूदि०
यद्विद्युतो रोहित
 
३६१
 
. ३५८
 
यथा विलीनमेवाङ्गास्या ० ३९६