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५६२.
 
छान्दोग्योपनिषन्मन्त्र-
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
एतमु एवाहमभ्यगासिषं
 
४१
 
एषां भूतानां पृथिवी ;
 
११
 
४३
 

 
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"
 
एवमेव खलु सोम्य
 
एतमृग्वेदमभ्यतप५०
 
एतेषां मे देहीति
 
१४१ ओ३मदा३मों३
 
६५ ओमित्येतदक्षरमु०
 
एव ँ सोम्य ते षोडशानां ३७१
 
३९२
 
१०.
 
ओमित्येतदक्षरमुद्गीथमु०
 
३७
 

 
एवमेव खलु सोम्या ०
 
३६६
 
औपमन्यव कं त्वमा
 
३१६
 
एवमेव खलु सोम्येमाः
 
एवमेव प्रतिहर्तारमुवाच
एवमेवैष मघवन्निति
 
३८९
 

 
६९
 
कं ते काममागायानीत्येष ५३
 
५२२
 
कतमा कतमर्कतम ०
 
१२
 
५२८
 
"
 
एवमेवैष संप्रसादो
एवमेवोद्गातारमुवा •
 
एवमेषां लोकानामासां
 
"
 
कल्पन्ते हास्मा ऋतव
 
९.१
 
५३.९
 
कल्पन्ते हास्भै
 
८८
 
६८
 
का साम्नो गतिरिति
 
५७
 
२५४
 
कुतस्तु खलु
 
રૂ×૪
 
एष उ एव भामनीरेष
 
२४६
 
एष उ एव वामनीरेष
 
२४५
 
एष तु वा अतिवदति
 
४५३
 
क्व तर्हि यजमानस्य
 
गायत्री वा इद सर्व
 
१३१
 

 
१५९
 
एष म आत्मान्तर्हृदये
 
१७६
 
गोअश्वमिह महिमेत्या • ४६१
 
एष
 
वै
 
यजमानस्य
 
१३६
 

 
एष ह वा उदक्प्रवणो
 
२५५
 
एष ह वै यज्ञो योऽयं
 
२४९
 
चक्षुरेव ब्रह्मणश्चतुर्थः
चक्षुरेवर्गात्मा साम
 
.
 
१९४
 
५०