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५६०
 
छान्दोग्योपनिषन्मन्त्र-
 
पृष्ठम्
 
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अथ हैनमुद्रातोपससाद
 
७२
 
अन्तरिक्षोदरः कोशो
 
१७९
 
अथ हैनमृषभोऽम्युवाद २२३
 
अन्नं वावं बलाद्भूय०
 
४३७
 
अथ होवाच. जन
 
३२०
 
अन्नमयः हि सोम्य
 
३६७
 
अथ होवाच बुडिलमा०
 
३२१
 
३६४
 
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अथ होवाच सत्ययज्ञं
 
३१८
 
अन्नमशितं त्रेधा विधी ० ३६३
 
अथ होवाचेन्द्रद्युम्नं
 
३१९
 
अन्नमिति होवाच
 
७३
 
अथ होवाचोद्दालक •
 
३२२
 
अन्यतरामेव वर्तनी
 
२५०
 
अथात आत्मादेश
 
४६३
 
अपां का गतिरित्यसौ
 
५७
 
अथातः शौव उद्गीथ •
 
७५
 
अपार सोम्य पीयमानानां ३६६
 
अथाधिदैवतं
 
२९
 
. अपाने तृप्यति वाक्तृ० ३२८
 
अथाध्यात्मं प्राणो
 
२१४
 
अभिमन्थति स हिंकारो १०५
 
अथाध्यात्मं य एवायं .
 
४२
 
अभ्रं भूत्वा मेघो भवति ३०२
 
. अथाध्यात्मं वागेवप्रणः
 
५०
 
अभ्राणि संप्लवन्ते
 
१०९
 
अथानु किमनुशिष्टो
 
२७८
 
अमृतत्वं देवेभ्य
 
११८
 
अथानेनैव ये चैतस्मा ०
 
५३
 
अयं वाव लोको
 
७८
 
अथावृत्तेषु चौकार
 
८७
 
अयं वाव स योऽयमन्त ० १६३
 
अथैतयोः पथोर्न कतरेण ३०८
 
अयं वाव स योऽयमन्तर्ह ० १६३
 
अथोंताप्याहुः साम
 
८४
 
अरिष्टं कोश
 
१८१
 
अधीहि भगव इति
 
४१६
 
अशनापिपासे मे सोम्य
 
३७७
 
'अनिरुक्तस्त्रयोदशः
 
अन्तरिक्षमेववयुः
 
७९ अशरीरो वायुरभ्रं
 
४६ असौ वा आदित्यो
 
५३८
 
१३९