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३०२
 
उपनिषन्मन्त्राणां
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
स जातो भूतान्यभि
 
२६६
 
सुषुप्तस्थानः प्राज्ञो ०
 
११५
 
सत्यमेव जयते नानृतं
 
६५
 
सोऽपोऽभ्यतपत्
 
२६०
 
सत्येन लभ्यस्तपसा
 
६४
 
सोऽयमात्माध्यक्षर ०
 
११३
 
सप्त प्राणाः प्रभवन्ति
 
४१
 
सोऽस्यायमात्मा
 
२८१
 
समाने वृक्षे पुरुषो
 
६०
 
स्वप्नस्थानस्तैजस-
 
११४
 
यो ह वै तत्परमं
 
७८ स्वप्नस्थानोऽन्तःप्रज्ञः
 
९३
 
सर्व ह्येतद्ब्रह्माय -
 
९१
 

 
स वेदैतत्परमं ब्रह्म
 
७१
 
हिरण्मये परे कोशे
 
५२
 
सा भावयित्री भवति
 
२८०