Proofing

✦

This page has not been fully proofread.

३००
 
जागरितस्थानो बहिः
 
०
 
जागरितस्थानो वैश्वानरो ०
 
त
 
उपनिषन्मन्त्रणां
 
पृष्ठम्
 
९२
 
तमशनायापिपासे
 
पृष्ठम्
२५८
 
० ११४
 
तस्माच्च देवा बहुधा
 
४०
 
तस्मादग्निः समिधो
 
३८
 
तच्चक्षुषाजिघृक्षत्
 
२६१
 
तस्मादिदन्द्रो नामे ०
 
२६७
 
तच्छिनाजिघृक्षत्
 
२६२
 
तस्मादृचः साम
 
३९
 
तच्छ्रोत्रेणाजिघृक्षत्
 
२६१
 
तस्मै स विद्वानुपस
 
३०
 
तत्त्वचाजिघृक्षत्
 
२६१
 
तस्मै स होवाच
 
१२
 
तत्प्राणेना जिघृक्षत्
 
२६१
 
ता एता देवताः सृष्टाः
 
२५५
 
तत्रापरा ऋग्वेदो
 
१२
 
ताभ्यः पुरुषमानयत्ताः
 
२५७
 
तस्त्रिया आत्मभूयं
 
२८०
 
ताभ्यो गामानयत्ताः
 
२५६
 
तदपानेना जिघृक्षत्
 
२६२
 
द
 
तदुक्तमृषिणा
 
२८३
 
दिव्यो ह्यमूर्तः पुरुषः
 
३४
 
तदेतत्सत्यं मन्त्रेषु
 
१९
 
द्वा सुपर्णा सयुजा
 
५९
 
तदेतत्सत्यं यथा
 
३३
 
ध
 
तदेतत्सत्यमृषिर ०
 
८०
 
धनुगृहीत्वौपनिषदं
 
४६
 
तदेतदृचाभ्युक्तं
 
७९
 
न
 
तदेनदभिसृष्टं
 
२६१
 
न चक्षुषा गृह्यते
 
६७
 
तन्मनसाजिघृक्षत्
 
२६२
 
न तत्र सूर्यो भाति
 
५३
 
तपःश्रद्धे ये ह्युप०
 
२६
 
नान्तः प्रज्ञं नवहिः प्रज्ञं
 
१०३
 
तपसा चीयते ब्रह्म
 
१६
 
नायमात्मा प्रवचनेन
 
७२
 
तमभ्यतपत्तस्याभि०
 
२५३
 
नायमात्मा बलहीनेन
 
७३