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वर्णानुक्रमणिका ।
 
३ १७ १
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
स त्वं प्रियान्प्रियरू ०
 
१५४
 
सुकेशा च भारद्वाजः
 
२३८
 
स त्वमग्निं स्वर्ग्य ०
 
१३९
 
सूर्यो यथा सर्व •
 
२१०
 
स पर्यागाच्छुक्रमका ०
 
१५
 
सोऽभिमानादूर्ध्व ०
 
२५३
 
स प्राणमसृजत
 
३०१
 
स्वप्नान्तं जागरिता ०
 
१९३
 
स यथा सोम्य
 
२७७
 
स्वर्गे लोके न भयं
 
१३८
 
स यथेमा नद्यः
 
३०२
 

 
स यदा तेजसा
 
२७६
 
ह ँस: शुचिषद्वसु०
 
२०३
 
स यद्येकमात्रम ०
 
२८४
 
हन्त त इदं प्रव
 
२०६
 
सर्वे वेदा यत्पद०
 
१६३
 
हन्ता चेन्मन्यते हन्तु
 
१६६
 
सह नाववतु
 
२३०
 
हिरण्मयेन पात्रेण
 
२३
 
स होवाच पितरं
 
१३३
 
हृदि ह्येष आत्मा
 
२६३