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३ १४
 
उपनिषन्मन्त्रणां
 
पृष्टम्
 
पृष्ठम्
 
तान्वरिष्ठः प्राण
 
२५२ न प्राणेन नापनेन
 
२०६
 
तान्ह स ऋषि ०
तान्होवाचैताव •
 
२३९
 
न वित्तेन तर्पणीयो
 
१४९
 
३०४
 
न संदृशे तिष्ठति
 
२२२
 
तिस्रो मात्रा मृत्यु •
 
२८७
 
न सांपरायः प्रतिभाति
 
१५६
 
तिस्रो रात्रीर्यदवा ०
 
१३६
 
नाचिकेतमुपाख्यानं
 
१८४
 
तेऽग्निमब्रुवन्
 
.६३, १०५
 
नायमात्मा प्रवचनेन
 
१६९
 
तेजो ह वाव उदा०
 
२६५
 
नाविरतो दुश्चरितात्
 
१७०
 
ते तमर्चयन्तस्त्वं हि
 
३०५
 
नाह मन्ये सुवेदेति
 
५३,९८
 
तेषामसौ विरजो
 
२४९
 
नित्यो नित्यानां
 
२१२
 
त्रिणाचिकेतस्त्रयमे ०
 
१४२
 
नैव वाचा न मनसा
 
२२४
 
त्रिणाचिकेत स्त्रिभि०
 
१४२
 
नैषा तर्केण मति ०
 
१५९
 

 

 
दूरमे विपरी
 
१५४
 
पञ्चपादं पितरं
 
२४५
 
देवानामसि वह्नितमः
 
२५६
 
परमेवाक्षरं प्रति ०
 
२८०
 
देवैरत्रापि विचिकि०
देवैरत्रापि विचिकि०
 
१४५
 
पराचः कामाननुयन्ति
 
१९१
 
१४६
 
पराचि खानि व्यतृ०
 
१८९
 

 
पायूपस्थेऽपानं
 
२६२
 
न जायते म्रियते
 
१६५
 
पीतोदका जग्धतृणा
 
१३२
 
न तत्र चक्षुर्गच्छति
 
४२,८९
 
पुरमेकादशद्वार
 
2
 
२०२
 
न तत्र सूर्यो भाति
 
- २१३
 
पूषन्नकर्षे यम
 
२३
 
न नरेणावरेण
 
१५७
 
पृथिवी च पृथिवी०
 
२७७