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वर्णानुक्रमणिका ।
 
३१३
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
एको वशी सर्व
 
२११
 
तजति तन्नैजति
 
१२
 
एतच्छ्रुत्वा संपरिगृह्य
 
१६२
 
तदेतदिति मन्यन्ते
 
२१२
 
एतत्तुल्यं यदि मन्यसे
 
१४७
 
तद्ध तद्वनं नाम
 
७१, ११९
 
एतदालम्बनं श्रेष्ठं
 
१६४
 
तद्धैषां विजज्ञौ
 
६२, १०५
 
एतद्ध्येवाक्षरं ब्रह्म
 
१६४
 
तद्येह वै तत्प्रजा
 
२४८
 
एष
 
तेऽग्निर्नन्त्रिकेतः
 
१४३. तमब्रवीत्प्रीयमाणो
 
१४१
 
एष सर्वेषु भूतेषु
 
१८०
 
तस्माद्वा इन्द्रो
 
६९,११७
 
एप सुप्तेषु जागर्ति
 
२०८
 
तस्माद्वा एते देवा
 
६८, ११७
 
एव हि द्रष्टा स्पष्टा
एषोऽग्निस्तपत्येष
 
२७९
 
तस्मिंस्त्वयि किं
 
६५,१०६
 
२५४
 
तस्मिंस्त्वयि किं
 
६३,१०५
 

 
तस्मै तपो दमः
 
७४, १२०
 
कामस्याप्तिं जगतः
 
१६०
 
तस्मै तृणं निद •
 
६३,१०६
 
कुर्वन्नेवेह कर्माणि
 

 
तस्मै तृणं निद०
 
६५, १०६
 
केनेषितं पतति
 
३६,८६
 
तस्मै स होवाच यथा
 
२७०
 

 
तस्मै स होवाच
 
२५१
 
जानाम्यह : शेवधि •
 
१६०
 
तस्मै स होवाच प्रजा
 
२४०
 

 
तस्मै स होवाचा ०
 
२६१
 
तं दुर्दशं गूढमनु
 
१६१
 
तस्मै स होवाचे
 
२९१
 
तरह कुमार सन्तं
 
१३२
 
तस्मै स होवाच
 
२८३
 
तदभ्यद्रवत्तमभ्य ० ६५,१०६
 
तस्यैष आदेशो
 
६९,११७
 
तदभ्यद्रवत्तमभ्य:
 
६३,१०५ तां योगमिति मन्यन्ते
 
२२३