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लक्ष्मीनृसिंहकरुणारसस्तोत्रम् ।
 
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१७
 
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प्रह्लादनारदपराशरपुण्डरीक-
 

व्यासादिभागवतपुंगव हृन्निवास ।

भक्तानुरुक्तपरिपालनपारिजात
 

लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ॥ १६ ॥
 
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लक्ष्मीनृसिंहचरणाब्जमधुव्रतेन
 

स्तोत्रं कृतं शुभकरं भुवि शंकरेण ।

ये तत्पठन्ति मनुजा हरिभक्तियुक्ता-
 

स्ते यान्ति तत्पदसरोजमखण्डरूपम् ॥ १७ ॥
 
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इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य
 

श्रीगोविन्द भगवत्पूज्यपादशिष्यस्य
 

श्रीमच्छंकरभगवतः कृतौ

लक्ष्मीनृसिंहकरुणारसस्तोत्रं संपूर्णम् ॥
 
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S. S. II. 2
 
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