2026-02-28 07:21:03 by akprasad
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<subtitle>॥ श्रीः ॥
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<title>॥ लक्ष्मीनृसिंहकरुणारसस्तोत्रम् ॥
</title>
<verse>श्रीमत्पयोनिधिनिकेतनचक्रपाणे
भोगीन्द्रभोगमणिराजित पुण्यमूर्ते ।
योगीश शाश्वत शरण्य भवाब्धिपोत
लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ॥ १ ॥
</verse>
<verse>ब्रह्मेन्द्ररुद्रमरुदर्ककिरीटकोटि-
संघट्टिताङ्घ्रिकमलामलकान्तिकान्त ।
लक्ष्मीलसत्कुचसरोरुहराजहंस
लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ॥ २ ॥
</verse>
<verse>संसारदावदहनाकर भीकरोरु-
ज्वालावलीभिरतिदग्धतनूरुहस्य ।
त्वत्पादपद्मसरसीरुहमागतस्य
लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ॥ ३ ॥
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<subtitle>॥ श्रीः ॥
<title>॥ लक्ष्मीनृसिंहकरुणारसस्तोत्रम् ॥
<verse>श्रीमत्पयोनिधिनिकेतनचक्रपाणे
भोगीन्द्रभोगमणिराजित
योगीश शाश्वत शरण्य भवाब्धिपोत
लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ॥ १ ॥
<verse>ब्रह्मेन्द्ररुद्रमरुदर्ककिरीटकोटि-
संघट्टिताङ्घ्रिकमलामलकान्तिकान्त ।
लक्ष्मीलसत्कुचसरोरुहराजहंस
लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ॥ २ ॥
<verse>संसारदावदहनाकर
ज्वालावलीभिरतिदग्धतनूरुहस्य ।
त्वत्पादपद्मसरसीरुहमागतस्य
लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ॥ ३ ॥
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