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श्रीरामभुजङ्गप्रयातस्तोत्रम् ।
 
प्रसीद प्रसीद प्रचण्डप्रताप
 
प्रसीद प्रसीद प्रचण्डारिकाल ।
 
प्रसीद प्रसीद प्रपन्नानुकम्पिन्
 
प्रसीद प्रसीद प्रभो रामचन्द्र ॥ २८ ॥
 
भुजङ्गप्रयातं परं वेदसारं
 
मुदा रामचन्द्रस्य भक्त्या च नित्यम् ।
पठन्सन्ततं चिन्तयन्स्वान्तरङ्गे
 
स एव स्वयं रामचन्द्रः स धन्यः ॥ २९ ॥
 
इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य
 
श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य
श्रीमच्छंकरभगवतः कृतौ
 
श्रीरामभुजङ्गप्रयातस्तोत्रम् -
संपूर्णम् ॥
 
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