This page has been fully proofread once and needs a second look.

<page>
<ignore>
श्रीरामभुजङ्गप्रयातस्तोत्रम् ।
 
</ignore>
<verse>
अवीरासनस्थैरचिन्मुद्रिकाट्ढ्यै-

रभक्ताञ्जनेयादितत्त्वप्रकाशैः ।

अमन्दारमूलैरमन्दारमालै-
 

ररामाभिधेयैरलं दैवतैर्नः ॥ २४ ॥
 
</verse>
<verse>
असिन्धुप्रकोपैरवन्द्यप्रतापै-
 

रबन्धुप्रयाणैरमन्दस्मिताढ्यैः ।

अदण्डप्रवासैरखण्डप्रबोधै-
 

ररामाभिधेयैरलं दैवतैर्नः ॥ २५ ॥
 
</verse>
<verse>
हरे राम सीतापते रावणारे
 

खरारे मुरारेऽसुरारे परेति ।
 

लपन्तं नयन्तं सदाकालमेवं
 

समालोकयालोकयाशेषबन्धो ॥ २६ ॥
 
</verse>
<verse>
नमस्ते सुमित्रासुपुत्राभिवन्द्य
 

नमस्ते सदा कैकयीनन्दनेड्य ।
 

नमस्ते सदा वानराधीशवन्द्य
 

नमस्ते नमस्ते सदा रामचन्द्र ॥ २७ ॥
 
</verse>
<ignore>

 
</ignore>
</page>