2026-02-28 07:05:39 by akprasad
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<ignore>श्रीरामभुजङ्गप्रयातस्तोत्रम् ।
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<verse>महारत्नपीठे शुभे कल्पमूले
सुखासीनमादित्यकोटिप्रकाशम् ।
सदा जानकीलक्ष्मणोपेतमेकं
सदा रामचन्द्रं भजेऽहं भजेऽहम् ॥ ४ ॥
क</verse>
<verse>क्वणद्रत्नमञ्जीरपादारविन्दं
लसन्मेखलाचारुपीताम्बराढ्यम् ।
महारत्नहारोल्लसत्कौस्तुभाङ्ग
गं
नदच्चश्वञ्चरीमञ्जरीलोलमालम् ॥ ५ ॥
लस</verse>
<verse>लसच्चन्द्रिकास्मेरशोणाधराभं
समुद्यत्पतङ्गेन्दुकोटिप्रकाशम् ।
नमद्ब्रह्मरुद्रादिकोटीररत्न-'
स्फुरत्कान्तिनीराजनाराधिताङ्घ्रिम् ॥ ६ ॥
</verse>
<verse>पुरः प्राञ्जलीनाञ्जनेयादिभक्ता-
न्स्वचिन्मुद्रया भद्रया बोधयन्तम् ।
भजेऽहं भजेऽहं सदा रामचन्द्र
रं
त्वदन्यं न मन्ये न मन्ये न मन्ये ॥ ७ ॥
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<ignore>४
<ignore>श्रीरामभुजङ्गप्रयातस्तोत्रम् ।
<verse>महारत्नपीठे शुभे कल्पमूले
सुखासीनमादित्यकोटिप्रकाशम् ।
सदा जानकीलक्ष्मणोपेतमेकं
सदा रामचन्द्रं भजेऽहं भजेऽहम् ॥ ४ ॥
क
<verse>क्वणद्रत्नमञ्जीरपादारविन्दं
लसन्मेखलाचारुपीताम्बराढ्यम् ।
महारत्नहारोल्लसत्कौस्तुभाङ्
नदच्च
लस
<verse>लसच्चन्द्रिकास्मेरशोणाधराभं
समुद्यत्पतङ्गेन्दुकोटिप्रकाशम् ।
नमद्ब्रह्मरुद्रादिकोटीररत्न-
स्फुरत्कान्तिनीराजनाराधिताङ्घ्रिम् ॥ ६ ॥
<verse>पुरः प्राञ्जलीनाञ्जनेयादिभक्ता-
न्स्वचिन्मुद्रया भद्रया बोधयन्तम् ।
भजेऽहं भजेऽहं सदा रामचन्द्
त्वदन्यं न मन्ये न मन्ये न मन्ये ॥ ७ ॥
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