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श्रीरामभुजङ्गप्रयातस्तोत्रम् ।
 
महारत्नपीठे शुभे कल्पमूले
सुखासीनमादित्यकोटिप्रकाशम् ।
 
सदा जानकीलक्ष्मणोपेतमेकं
 
सदा रामचन्द्रं भजेऽहं भजेऽहम् ॥ ४ ॥
 
कणद्रत्नमञ्जीरपादारविन्दं
 
लसन्मेखलाचारुपीताम्बराढ्यम् ।
 
महारत्नहारोल्लसत्कौस्तुभाङ्ग
 
नदच्चश्वरीमञ्जरीलोलमालम् ॥ ५ ॥
 
लसचन्द्रिकास्मेरशोणाधराभं
 
समुद्यत्पतङ्गेन्दुकोटिप्रकाशम् ।
 
नमद्ब्रह्मरुद्रादिकोटीररत्न-'
 
स्फुरत्कान्तिनीराजनाराधिताङ्घ्रिम् ॥ ६ ॥
 
पुरः प्राञ्जलीनाञ्जनेयादिभक्ता-
 
स्वचिन्मुद्रया भद्रया बोधयन्तम् ।
 
भजेऽहं भजेऽहं सदा रामचन्द्र
 
त्वदन्यं न मन्ये न मन्ये न मन्ये ॥ ७ ॥