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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
१५५
 
पृष्ठम्
 
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मूर्ता मूर्ते पूर्व •
मृत्स्ना मत्सीदेति
मोदात्पादादिकेश
 
५४
 
यस्यात स्वात्म •
 
५१.
 
५६
 
यस्या दाम्ना
 
२७
 
३५
 
यस्यामिदं कल्पित •
 
१४३
 

 
यस्यैकांशादित्थ •
 
४५.
 
यं ब्रह्माख्यं
 
४६
 
यावत्पवनो
 
६३
 
यं विज्ञानज्योतिषं .
 
५५
 
यावद्वित्तोपार्जन •
 
६३.
 
यक्षराजबन्धवे
 
१२४
 
या वायावानुकूल्यात्
 
२९
 
यतः सर्व जातं
 
४२
 
या सूते सत्त्वजालं
 
२४.
 
यत्कटाक्षसमुपासना ०
 
७३
 
युक्त्यालोड्य व्यास
 
५२
 
यत्र प्रत्युतरत्न
 
३३ येनाविष्टो यस्य
 
५०
 
यदा धर्मग्लानिः
 
४४
 
येभ्यो वर्णश्चतुर्थः
 
२५
 
यदा मत्समीपं
 
५ येभ्योऽसूयद्भिरुच्चैः
 
२४
 
यदावर्णयत्कर्णमूले
 
३ योगरतो वा
 
६६
 
यद्यद्वेद्यं तत्तदहं
 
४७
 
योगानन्दकरी
 
७५
 
यद्यद्वेद्यं वस्तु
 
४७
 
यो डाकिनीशाकिनि ०
 
१३२
 
यशो मे गतं
 
१४१
 
योऽयं देहे चेष्टयिता •
 
५२
 
यस्ते प्रसन्ना ०
 
८८
 
यो विश्वप्राणभूत •
 
२३
 
यस्मादन्यन्नास्त्यपि
 
४६
 
र :
 
यस्मादाक्रामतो द्यां
 
२५
 
रजः सत्त्वतमो०
 
१०९
 
यस्माद्वाचो निवृत्ताः
 
३४
 
रत्नपादुकाप्रभा ०.
 
९०
 
यस्यां दृष्ट्वामलायां
 
२६
 
रथारूढो
 
११५