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१५२
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
देवो भीतिं विधातुः
 
२७
 
नादे नारद •
 
८२
 
.
 
दैवतानि क
 
८७
 
नानायोगमुनीन्द्र
 
८०
 
धर्मसेतुपालकं
 
द्वन्द्वैकत्वं यच्च
 
धन्यां सोमविभावनीय
 
धेनुकारिष्टहा •
 
ध्यातव्याभाव
 
५२
 
नानारत्नविचित्र
 
७५
 

 
नाभीनालीकमूलात्
 
२८
 
१२०
 
नारायण करुणामय
 
११८
 
९०
 
नारीस्तनभर
 
६२
 

 
४०
 
नाहं प्राणो नैव
 
५४.
 
निजे मानसे मन्दिरे
 

 
नित्यं स्नेहातिरेकात्
 
३१
 
न भोगे न योगे
 
नमः सच्चिदानन्द
 
१४१
 
नित्यानन्दक
 
७५.
 
निरञ्जनस्य किं
 
१०७
 
नमस्कारोऽष्टाङ्ग
 
६१
 
निरावरणचैतन्यं
 
१०९
 
नमस्ते नमस्ते
 

 
निर्मलस्य कुतः
 
१०७
 
नमस्ते सुमित्रासुपुत्रा०
 
निर्लेपस्य कुतो
 
१०७
 
नमो भक्तियुक्तानुरक्ताय ६
 
नैवेद्यमात्म लिङ्गस्य
 
१०९
 
नमो विश्वकर्त्रे
 
६ न्यङ्कुपाणये
 
१२७
 
नमोऽस्तु नालीक
 
७३
 

 
४३ पद्मानन्दप्रदाता.
 
३०
 
नलिनीदलगत
 
६३
 
पोम्भोधेद्वपात्
 
५९
 
नंवेजलदद्युति
 
९९
 
परब्रह्मापीडः
 
११५
 
प्रार्थ्य
 
११५
 
परिभ्रमन्ति ब्रह्मा०
 
११०