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१५०
 
श्लोकानुक्रमणिकाः ।
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
कुतो वीची
 
१०२
 
गन्धर्वामर
 
८२
 
कुरङ्गे तुरंगे
 
१३८
 
गायत्रीं गरुडध्वजां
 
१२१
 
कुरुते गङ्गा
 
६६
 
गीयते श्रुतिभिः
 
१०८
 
कृच्छ्रः कोटिशतैः
 
१०६
 
गीर्देवतेति
 
७२
 
कृपापारावारः
 
११५
 
गुरुचरणाम्बुज
 
६९
 
कृपापारावारां
 
९८ गुरोरष्टकं यः
 
१४२
 
कृष्ण गोविन्द हे
 
४०
 
गेयं गीतानाम
 
६८
 
कैलासाचल
 
७६
 
गोपालं प्रभुलीला
 
५७
 
कोटीराङ्गदरत्न
 
८१
 
गोपीमण्डलगोष्ठी
 
५७
 
कोऽयं देहे देव
 
५३ गोविन्दाष्टकमेतत्
 
५८
 
कोशानेतान्पञ्च
 
५०
 
कोशेषु पञ्चस्वधि०
 
१४३
 
चक्रस्थेऽचपले
 
८१
 
को ह्येवान्यादात्मनि
 
५३
 
चन्द्रार्कानल
 
७७
 
४ चाञ्चल्यारुण
 
११९
 
क्षत्रत्राणकरी.
 
७७
 
चाम्पेयगौरा
 
१३४
 
क्षमामण्डले
 
१४१
 
चारुस्थितं सोम
 
८६
 
क्षेत्रज्ञत्वं प्राप्य
 
५१
 
चिदंशे विभुं
 
१८
 

 

 
गङ्गातीरमनुत्तमं
 
१०५
 
जटिली मुण्डी
 
६५
 
गङ्गाष्टकमिदं पुण्यं
 
१०.३.
 
जन्ममृत्युघोर
 
१२४
 
गतं तदैव
 
९३
 
जरेयं पिशाचीव
 
२०