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१४८
 
अविनयमपनय
 
अवीरासनस्थै •
 

 
अव्यान्निर्घात
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
पृष्ठम्
 
११७. आहुर्यस्य स्वरूपं
 
२२ इदं तु नर्मदाष्टकं
 
पृष्ठम्
 
२२
 
९४
 
असिन्धुप्रकोपै ०
 

 
इन्द्राद्यास्त्रिदशाः
 
१०४
 
असीतासमेतै •
 

 
इष्टवस्तुमुख्य
 
१२२
 
अस्नायम्यादौ
 
४२
 
इष्टाविशिष्टमतयो •
 
७२
 
अहो धृतं स्वनं
 
९४
 

 

 
ईश्वरो गुरुरात्मेति
 
१०९
 
आकृतिसाम्याच्छाल्म •
 
११
 
हितक्षणप्रदान
 
१२६
 
आक्रामद्भयां त्रिलोकी
 
२५
 

 
आचार्येभ्यो लब्ध
 
४६
 
उद्धृतनग
 
११८
 
आत्मनः सत्क्रिया
 
११०
 
उद्यद्भानुसहस्र
 
७९
 
आदावादिपितामहस्य
 
१०२
 
उन्नम्रं कम्रमुच्चै०
 
२७
 
आदिक्षान्त
 
७६
 
उपासकानां त्व०
 
८८
 
आदौ कल्पस्य
 
२८
 
उपासकानां य०
 
८४
 
आपदद्रिभेद
 
१२३
 
उपासते यं
 
८७
 
आपादादा च शीर्षात्
 
३४
 
उर्वीसर्वजनेश्वरी
 
७६
 
आमर्दसंज्ञे
 
१३१
 

 
आमीलिताक्ष •
 
७१
 
एकीकृत्यानेक
 
५२
 
आराधयामि
 
१०८
 
एकेन चक्रमपरेण
 
१६
 
आलेपवन्तं
 
८६ एकेन मुद्रां
 
८६