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यमुनाष्टकम् ।
 
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अतिविपदाम्बुधिमग्नजनं भवतापशताकुलमानसकं
 

गतिमतिहीनमशेषभयाकुलमागतपादसरोजयुगम् ।

ऋणभयभीतिमनिष्कृतिपातककोटिशतायुतपुञ्जतरं
 
८९.९
 

जय यमुने जय भीतिनिवारिणि संकटनाशिनि पावय माम् ॥
 
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नवजलद्युतिकोटिलसत्तनुंनुहेमभयाभरजितके

तडिदवहेलिपदाश्ञ्चलचञ्चलशोभितपीतसुचेलधरे ।

मणिमयभूषणचित्रपटासनरञ्जितगञ्जितभानु करें
 
करे
जय यमुने जय भीतिनिवारिणि संकटनाशिनि पावय माम् ॥
 
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शुभपुलिने मधुमत्तयदूद्भवरास महोत्सव के लिभरे

उच्चकुलाचलराजित मौक्तिकहारमयाभररोदसिकेंके

नवमणिकोटिकभास्करकञ्चुकिशोभिततारकहारयुते
 

जय यमुने जय भीतिनिवारिणि संकटनाशिनि पावय माम् ॥
 
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करिवरमौक्तिक नासिक भूषणवातचमत्कृतचश्ञ्चलके

मुखकमलामल सौरभचञ्चलमत्तमधुत्व्रतलोचनिके ।

मणिगणकुण्डललोलपरिस्फुरदा कुलगण्डयुगामलके
 

जय यमुने जय भीतिनिवारिणि संकटनाशिनि पावय माम् ॥
 
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