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॥ श्रीः ॥
 
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॥ यमुनाष्टकम् ॥
 
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-883-
 
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मुरारिकायकालिमाललामवारिधारिणी
 

तृणीकृतत्रिविष्टपा त्रिलोकशोकहारिणी ।

मनोनुकूलकूलकुञ्जपुञ्जधूतदुर्मदा
 

धुनोतु नो मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥ १ ॥
 
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मलापहारिवारिपूरिभूरिमण्डितामृता
 

भृशं प्रवातकप्रपञ्चनातिपण्डितानिशा ।
 

सुनन्दनन्दिनाङ्गसङ्गरागरञ्जिता हिता
 

धुनोतु नो मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥ २ ॥
 
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लसत्तरङ्गसङ्गधूतभूतजातपातका
 

नवीन माधुरी धुरीणभक्तिजातचातका ।
 

तटान्तवासदासहंस संवृताहिह्निकामदा
 

धुनोतु नो मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा ॥ ३ ॥
 
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