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सुवर्णमालास्तुतिः ।
 
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डम्बरमम्बुरुहामपि दलय-
 

त्यनघं त्वदविङ्घ्रियुगलं भो ।

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २८ ॥
 
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ढक्काक्षसूत्रशूलदुद्रुहिणक-
 

रोटी समुल्लसत्कर भो ।

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २९ ॥
 
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णाकारगर्भिणी चेच्छुभदा
 

ते शरगतिर्नृणामिह भो
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३० ॥
 
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तव मन्वति संजपतः सद्य-
 

स्तरति नरो हि भवाब्धि भो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३१ ॥
 
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