2026-02-28 21:56:47 by akprasad
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<ignore>सुवर्णमालास्तुतिः ।
</ignore>
<verse>झणुतकझङ्किणुझणुतत्किंकिटतक-
शब्दैर्नटसि महानट भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २४ ॥
</verse>
<verse>ज्ञानं विक्षेपावृतिरहितं
कुरु मे गुरुस्त्वमेव विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २५ ॥
</verse>
<verse>टङ्कारस्तव धनुषो दलयति
हृदयं द्विषामशनिरिव भो
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २६ ॥
</verse>
<verse>ठाकृतिरिव तव माया बहिर -
न्तः शून्यरूपिणी खलु भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २७ ॥
</verse>
<ignore>८५
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<ignore>सुवर्णमालास्तुतिः ।
<verse>झणुतकझङ्किणुझणुतत्
शब्दैर्नटसि महानट भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २४ ॥
<verse>ज्ञानं विक्षेपावृतिरहितं
कुरु मे गुरुस्त्वमेव विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २५ ॥
<verse>टङ्कारस्तव धनुषो दलयति
हृदयं द्विषामशनिरिव भो
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २६ ॥
<verse>ठाकृतिरिव तव माया बहिर
न्तः शून्यरूपिणी खलु भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २७ ॥
<ignore>८५
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