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सुवर्णमालास्तुतिः ।
 
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ज्ञप्तिः सर्वशरीरेष्वखण्डि-
 

ता या विभाति सा त्वं भो ।

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २० ॥
 
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चपलं मम हृदयकपिं विषय-
 

द्रुचरं दृढं बधान विभो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २१ ॥
 
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छाया स्थाणोरपि तव तापं
 

मतां हरत्यहो शिव भो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २२ ॥
 
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जय कैलासनिवास प्रमथग-
 

णाधीश भूसुरार्चित भो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २३ ॥
 
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