2026-02-27 07:03:14 by akprasad
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<ignore>सुवर्णमालास्तुतिः ।
</ignore>
<ignore>८३
</ignore>
<verse>करुणावरुणालय मयि दास उ-
दासस्तवोचितो न हि भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १६ ॥
</verse>
<verse>खलसहवासं विघटय घटय स-
तामेव सङ्गमनिशं भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १७ ॥
</verse>
<verse>गरलं जगदुपकृतये गिलितं
भवता समोऽस्ति कोऽत्र विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १८ ॥
</verse>
<verse>घनसारगौरगात्र प्रचुरज-
टाजूटबद्धगङ्ग विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १९ ॥
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<ignore>सुवर्णमालास्तुतिः ।
<ignore>८३
<verse>करुणावरुणालय मयि दास उ-
दासस्तवोचितो न हि भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १६ ॥
<verse>खलसहवासं विघटय घटय स-
तामेव सङ्गमनिशं भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १७ ॥
<verse>गरलं जगदुपकृतये गिलितं
भवता समोऽस्ति कोऽत्र विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १८ ॥
<verse>घनसारगौरगात्र प्रचुरज-
टाजूटबद्धगङ्ग विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १९ ॥
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