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सुवर्णमालास्तुतिः ।
८३
करुणावरुणालय मयि दास उ-
दासस्तवोचितो न हि भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १६ ॥
खलसहवासं विघटय घटय स-
तामेव सङ्गमनिशं भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १७ ॥
गरलं जगदुपकृतये गिलितं
भवता समोऽस्ति कोऽत्र विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १८ ॥
घनसारगौरगात्र प्रचुरज-
टाजूटबद्धगङ्ग विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १९ ॥
८३
करुणावरुणालय मयि दास उ-
दासस्तवोचितो न हि भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १६ ॥
खलसहवासं विघटय घटय स-
तामेव सङ्गमनिशं भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १७ ॥
गरलं जगदुपकृतये गिलितं
भवता समोऽस्ति कोऽत्र विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १८ ॥
घनसारगौरगात्र प्रचुरज-
टाजूटबद्धगङ्ग विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १९ ॥