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८२
 
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सुवर्णमालास्तुतिः ।
 
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ओमिति तव निर्देष्ट्री माया -

स्माकं मृडोपकर्त्री भो ।

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १२ ॥
 
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औदास्यं स्फुटयति विषयेषु दि-

गम्बरता च तवैव विभो ।

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १३ ॥
 
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अन्तःकरणविशुद्धिं भक्ति
 

त्वसितयि सतीं प्रदेहि विभो ।

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १४ ॥
 
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अस्तोपाधिसमस्तव्यस्तै
 

रूपैर्जगन्मयोऽसि विभो
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 
1
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १५ ॥
 
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