2026-02-27 07:00:25 by akprasad
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<ignore>८२
</ignore>
<ignore>सुवर्णमालास्तुतिः ।
</ignore>
<verse>ओमिति तव निर्देष्ट्री माया -
स्माकं मृडोपकर्त्री भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १२ ॥
</verse>
<verse>औदास्यं स्फुटयति विषयेषु दि-
गम्बरता च तवैव विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १३ ॥
</verse>
<verse>अन्तःकरणविशुद्धिं भक्ति
च
च त्वसितयि सतीं प्रदेहि विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १४ ॥
</verse>
<p>अस्तोपाधिसमस्तव्यस्तै
रूपैर्जगन्मयोऽसि विभो
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
1
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १५ ॥
</p>
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<ignore>८२
<ignore>सुवर्णमालास्तुतिः ।
<verse>ओमिति तव निर्देष्ट्री माया
स्माकं मृडोपकर्त्री भो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १२ ॥
<verse>औदास्यं स्फुटयति विषयेषु दि-
गम्बरता च तवैव विभो ।
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १३ ॥
<verse>अन्तःकरणविशुद्धिं भक्ति
च
च त्व
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १४ ॥
<p>अस्तोपाधिसमस्तव्यस्तै
रूपैर्जगन्मयोऽसि विभो
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
1
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १५ ॥
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