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सुवर्णमालास्तुतिः ।
 
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ऋक्षाधीशकिरीट महोक्षा-
 

रूढ विधृतरुद्राक्ष विभो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ८ ॥
 
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ऌवर्णद्वन्द्वमवृन्तसुकुसुममि-
 

वाङ्घ्रौ तवार्पयामि विभो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ९ ॥
 
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एकं सदिति श्रुत्या त्वमेव

सदसीत्युपास्महे मृड भो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १० ॥
 
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ऐक्यं निजभक्तेभ्यो वितरसि
 

विश्वंभरोऽत्र साक्षी भो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ११ ॥
 
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S. S. 6
 
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८१
 
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