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शिवभुजंगम् ।
 
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भुजंगप्रियाकल्प शंभो मयैवं
 

भुजंगप्रयातेन वृत्तेन क्लप्तम् ।

नरः स्तोत्रमेतत्पठित्वोरुभक्त्या

सुपुत्रायुरारोग्यमैश्वर्यमेति ॥ ४० ॥
 
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इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य
 

श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य
 

श्रीमच्छंकरभगवतः कृतौ
 

शिवभुजंगं संपूर्णम् ॥
 
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२५
 
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