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२८८
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम
 
सा रसना ते नयने
 
४९
 
स्तुतिं ध्यानमची
 
१८
 
सारूप्यं तव पूजने
 
३३
 
स्तोत्रं त्रिसंध्यं शिवपार्व० १२४
 
सितयाञ्चितलडुक
सिन्दूराभैः सुन्दरै ०
 
3
 
२१२
 
स्तोत्रमेतत्प्रजपतः
 
१८४
 
१७८
 
स्तोत्रेणालमहं प्रवच्मि
 
५१
 
सीमन्ते ते भगवति
 
२२४
 
स्थानप्राप्त्या स्वराणां
 
६१
 
सुकुमारे सुखाकारे
 
१७८
 
स्थित्वा स्थाने सरोजे
 
७६
 
सुगन्धपुष्पप्रकरैः
 
१०६
 
स्थिरो गङ्गावर्त:
 
१४४
 
सुताङ्गोद्भवो मेऽसि
 
१०
 
स्नात्वा प्रत्यूषकाले
 
19'
 
सुधाधारासारैश्वरण ०
 
१२७
 
स्निग्धं कङ्कतिकामुखेन
 
१९६
 
सुधामन्यास्वाद्य
 
१३२
 
स्फुरद्गण्डभोगप्रति ०
 
१३९
 
सुधासिन्धुसारे
 
१५७
 
स्फुरद्रत्नकेयूरहारा •
 
१०
 
सुधा सिन्धोर्मध्ये
 
१२७
 
स्फुरन्नानारत्नस्फटिक ०
 
१६२
 
सुनासापुटं सुन्दरभ्रललाटं २५९
 
स्फुरन्निष्ठुरालोल
 

 
सुवर्णरत्नभूषितै ०
 
१८९
 
स्फुरन्मन्दहासै:
 

 
सुवर्णादिव्याम्बरै०
 

 
स्फूर्जन्नव्ययवाङ्कुरो ०
 
१९१
 
सुशोणाम्बराबद्ध ०
 
२५८
 
स्मरं योनिं लक्ष्मी
 
१३३
 
सोमकलाधरमौल
 
४९. स्मेरचारुमुख मण्डलां
 
२४६
 
सौधे रत्नमये नवोत्पल०
 
११५
 
स्मरेत्प्रथमपुष्पिणीं
 
२३७
 
सौवीराञ्जनमिदमम्ब
 
२२२
 
स्मितज्योत्स्नाजालं
 
१४२
 
स्तम्भैर्जम्भारिरत्न •
 
५५
 
स्मृतौ शास्त्रे वैद्ये
 
२७
 
स्तवैर्ब्रह्मादीनां
 
३२ स्वदेहोद्भूताभिर्धृणि●
 
१३२