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२८४
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
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लब्ध्वा सकृत्रिपुरसुन्दरि २४२
 
वर्तित्रयोपेतमखण्डदीप्त्या १०९
 
ललाटं लावण्यद्युति०
 
१३६
 
वसन्ते सानन्दे कुसुमि० १६४
 
ललितेति सुधापूर०
 
१७३
 
वसिष्ठकुम्भोद्भव ० १२०
 
लसत्कनककुट्टिम०
 
१९५
 
वसुधातद्धरतच्छ०
 
९०
 
सत्ताहारामति
 

 
१५४ वस्त्रोद्धूतविधौ सहस्रकरता ३३
 
लसत्स्वर्णगेहे नृणां
 

 
वश्ये विद्रुमसंकाशां
 
१८२
 
लस ुद्युगदृशारके स्फुरति २०९
 
वहत्यम्ब स्तम्बेरम -
 
१४३
 
लसद्वृत्तमुत्तुङ्ग •
 
२५८
 
वाग्देवीति त्वां
 
१७३
 
लाक्षासंमिलितैः
 
२२५
 
वाणीमुपान्ते खलु
 
२१५
 
लीलालब्धस्थापितलुप्ता ० २५४
 
वामं वामाङ्कगाया
 
५९
 
लोकेशः पृथिवीपति ० २०७
 
वामाङ्कस्थामीशितु
 

 
१८३
 

 
वामाङ्के विस्फुरन्त्या
 
५८
 
वक्त्रं धन्याः संसृति ०
 
९६
 
वामेन स्वर्णपात्रीमनु०
 
२१३
 
वक्त्रेन्दोर्दन्तलक्ष्म्या
 
६७
 
वारणाननमयूरवाहमुख० २४७
 
वक्राकारः कलङ्की
 
६०
 
वाराणसीपुरपते
 
११७
 
वक्षस्ताडनमन्तकस्य
 
४२ वार्धक्ये चेन्द्रियाणां
 
७५
 
वक्षस्ताडनशङ्कया
 
४२ विकीर्णचिकुरोत्करे
 
१९०
 
वक्षो दक्षद्विषोऽलं
 
६७
 
विचित्रस्फुरद्रत्न ०
 

 
वचसा चरितं वदामि
 
४८
 
विजितहरमनोभूम
 

 
१९९
 
टु गेही वा यतिरपि
 
२८
 
विज्ञप्तीरवधेहि मे
 
२१७
 
वदद्भिरभितो मुदा
 
२०४
 
विततनिजमयूखैर्नि
 

 
१९९