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२७८
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
पृष्ठम्
 
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पदाम्बुजमुपासितुं
 
२०१
 
पुंनागमल्लिकाकुन्द ०
 
११३
 
पदे पदे यत्परिपूजकेभ्यः २३३
 
पुंस्कोकिलकलक्काण ०
 
१६९
 
पदे पदे सर्वतमोनिकृन्तनं ११४
 
पुरंदरपुरन्ध्रिका ०
 
२३८
 
पद्मकान्तिपदपाणि०
 
२४७
 
पुरारातरन्तः पुरमसि
 
१४८
 
परमामृतमत्तसुन्दरी ०
 
२१४
 
पुलिन्देशकन्या०
 

 
परागमद्रीन्द्रसुते
 
१७०
 
पुष्पवत्फुल्लताटङ्कां
 
१८२
 
पराजेतुं रुद्रं द्विगुण ०
 
१४५ पुष्टावष्टम्भभूतौ
 
६८
 
परात्मानमेकं
 
७२ पूजाद्रव्यसमृद्धयो विर०
 
४७
 
परिघीकृत सप्तसागरं
 
२३०
 
पूजामिमां पठे०
 
२३५
 
परिपतितपरागैः
 
१८७
 
पूजामिमां य:
 
२३५
 
परिमातुं तव मूर्ति
 
८८ पौरोहित्यं रजनिचरितं
 
७७
 
पर्यङ्कल्पोपरि
 
१६७
 
प्रकाशज्जपारक्तरल ०
 
पवित्रीकर्तु नः पशुपति ० १३८
 
प्रकृत्या रक्तायास्तव
 
१४०
 
पशुं वेत्सि चेन्मां
 
१८
 
प्रचरत्यभितः प्रगल्भवृच्या ५०
 
पशूनां पतिं पापनाशं
 
७ १
 
प्रजामात्रं प्रापितसंविन्निज ० १००
 
पाद्यं ते परिकल्पयामि
 
१९२
 
प्रणम्यासकृत्पादयोस्ते
 
११
 
पापोत्पातविमोचनाय
 
३६
 
प्रत्यङ्गं परिमार्जयामि
 
१९५
 
पारिजातशत पत्रपाटलै०
 
२२४
 
प्रत्यहं भक्तिसंयुक्तो
 
२३५
 
पीतं ते परिकल्पयामि
 
१९५
 
प्रत्याहारध्यानसमाधि ०
 
२५४
 
पीनोत्तुङ्गपयोधराः
 
१९३
 
प्रत्याहारप्राणनिरोधा •
 

 
९९
 
पुंनागनीलोत्पलकुन्द •
 
११४
 
प्रदीपज्वालाभि०
 
१५०