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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२७३
 
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जराजन्मगर्भाधिवासा •
जलजतिना करेण
जलधिमथनदक्षो
 
२२
 

 
२२०
 
ढक्काक्षसूत्रशूलद्रुहिण ०
 
८६
 
४७
 

 
जातीको रकतुल्य
 

 
२१२
 
णाकार गर्भिणी
 
८६
 
. जातीचम्पकपाटलादि ०
 
१८७
 
गानेत्येवं यन्मनुमध्यस्थित ० ९७
 
जानुद्वन्द्वेन मीनध्वज ०
ज्वलत्कोटिबालार्क •
 
५७
 

 

 
२५७
 
तटित्वन्तं शक्त्या
 
१३५
 
ज्वालाग्रः सकलामरा०
 

 
३४
 
तटिलेखातन्वीं
 
१३०
 
तत्र कामेशवाभाङ्के
 
१६८
 
झणुतकङ्किणु ०
 
८५
 
तत्र वप्रावली लीला
 
१६६
 
ज्ञ
 
तत्र स्फाटिकपीठमेत्य
 
१९४
 
ज्ञप्तिः सर्वशरीरेष्व०
 
८४
 
तत्रैव चिन्तामणिधो०
 
१६६
 
ज्ञांशीभूतान्प्राणिन
 
९९
 
तथान्ये विकल्पेषु
 
१५५
 
ज्ञानं विक्षेपावृतिरहितं
 
८५
 
तनीयांसं पांसुं
 
१२५
 

 
तनुच्छायाभिस्ते
 
१२९
 
टङ्कारस्तव धनुषो
 
८५ तनोतु क्षेमं नस्तव
 
१३६
 
तपनीयमयी सुतूलिका
 
२१९
 
ठाकृतिरिव तव
 
८५ तप्तस्वर्णच्छाय जटा ०
 
९८
 

 
डमरुडिण्डिमजर्झर ०
 
२३२
 
तव तत्त्वं विमृशतां
 
डम्बरमम्बुरुहामपि
 
८६
 
तरङ्गभ्रुकुटीकोटिभङ्गा १६६
 
१७९
 
तव दहनसदृक्षैरीक्षणैरेव २०४