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२७२
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
पृष्ठम्
 
चक्षुः प्रेङ्खत्प्रेमकारुण्य० १७६
 

 
चञ्चद्बालातपज्यो •
 
१७४
 
चञ्चद्वेत्रकराभिरङ्ग ०
 
२०२
 
छन्दः शाखिशिखान्वितै० ३७
छन्नेऽविद्यारूपपटेनैव
 
१००
 
चण्डीवक्त्रार्पणेच्छोस्तदनु ६४
 
छाया स्थाणोरपि
 
८४
 
चतुःषष्ट्या तन्त्रैः
 
१३२
 

 
चतुर्भिः श्रीकण्ठैः
 
१२७
 
जगजालमेतत्त्वयैवाम्ब
 
१५७
 
चतुश्चत्वारिंशद्विलसदुप० ११५
 
जगत्कर्मधीरान्वचो ०
 
१५७
 
चन्द्रापीडानन्दितमन्द ० २५४
 
जगत्रयीख्यात समस्त ०
 
१०७
 
चन्द्रोद्भासितशेखरे
 
७७
 
जगत्पवित्रि मामिका ०
 
१७४
 
चपलं मम हृदयकपिं
 
८४ जगत्सूते धाता हरिरवति १३१
 
चम्पकपङ्कजकुरवक ०
 
१०८
 
जगन्नाथ मन्नाथ
 
१६
 
चरणनलिनयुग्मं
 
२३३
 
जटारुणं चन्द्रकलाललाम १६७
 
चलत्कुन्तलान्त •
 
२५९
 
जडता पशुता
 
४३
 
चलन्त्यामम्बायां
 
२०२ जननमृतियुतानां
 
४६
 
चारुगोरोचनापङ्क ०
 
१६८
 
जननि चम्पकतैलमिदं
 
२२३
 
चिदानन्दसान्द्राय
 
५ जनित्री पिता च
 
१३
 
चिन्तामणिमयोत्तंस ०
 
चिदानन्दसुधाम्भोधे० १७२
 
१७७
 
जपो जल्पः शिल्पं
 
१३१
 
जम्ब्वाम्ररम्भाफलसंयुता० २२६
 
चूताशोकविकासिकेतक ०
चूर्णीकृतं द्रावि
 
० २०९
 
जम्बीरनीराञ्चित शृङ्गबेरं
 
११२
 
२११
 
जय कैलासनिवास
 
८४
 
तो जातप्रमोदं सपदि
 
६२
 
जयानन्दभूमन्
 
१४