This page has not been fully proofread.

श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२७१
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
क्षिप्रं लोके यं भजमानः
 
९७
 
गलन्ती शंभो
 
२६
 
क्षीरमेतदिदमुत्तमोत्तमं
 
२२६
 
गले रेखास्तिस्रो
 
१४२
 
क्षोणी यस्य रथो
 
९२
 
गाम्भीर्य परिघापदं
 
३६
 

 
गायन्तीः कलवीणया ०
 
१९०
 
खटाङ्गोदग्रपाणैः
 
६५ गिरामाहुर्देवीं
 
१४९
 
खलसहवासं विघटय
 
८३
 
गिरीशं गणेशं
 
७१
 

 
गिरौ मन्निवासे
 

 
गगनधुनीविमलजलै ०
 
११२ गुडदधिसहितं
 
१०६
 
गजवदन स्कन्दधृते ०
 
१०८
 
गुरुत्वं विस्तारं क्षिति •
 
१४५
 
२१५ गुरुस्त्वं शिवस्त्वं
 
२६०
 
गणेशाभिमुख्याखिलैः
 
२५९
 
गुहायां गेहे वा बहिरपि
 
२९
 
गणेश रम्ब
 
१५४
 
गृहाण परमामृतं
 
२०१
 
गतास्ते मञ्चत्वं
 
१४८
 
गोविन्दादधिकं
 
९३
 
गते कर्णाभ्यर्ण गरुत
 
तैर्माणिक्यत्वं गगनमणि १३५
 
१३८ गौरीविलासभवनाय
 
११८
 

 
गन्धपुष्पवर्षप
 
a
 
२२०
 
घटो वा मृत्पिण्डो०
 
२७
 
गन्धसारवनसार ०
 
२४६
 
घनसारगौरगात्र
 
८३
 
गभीरे कासारे
 
२८ घृतचीरद्राक्षामधुमधुरिमा १५९
 
गरलं जगदुपकृतये
 
८३
 
गर्भान्तःस्थाः प्राणिन
 
९६
 
चक्रं सेवे तारकं
 
१७८
 
गलद्दानगण्डं मिलद्भृङ्गषण्डं १५
 
चक्षुः पश्यतु नेह
 
२१४