2026-02-23 00:03:30 by ambuda-bot
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॥ eft: ॥
॥ देवीचतुःषष्ट्युपचारपूजास्तोत्रम् ॥
उषसि मागधमङ्गलगायनै-
र्झटिति जागृहि जागृहि जागृहि ।
अतिकृपाकटाक्षनिरीक्षणै-
जगदिदं जगदम्ब सुखीकुरु ॥ १ ॥
कनकमयवितर्दिशोभमानं
दिशि दिशि पूर्णसुवर्णकुम्भयुक्तम् ।
मणिमयमण्टपमध्य मे हि मात-
fe कृपयाशु समर्चनं ग्रहीतुम् ॥ २ ॥
कनककलशशोभमानशीर्ष
जलधरलम्बि समुल्लसत्पताकम् ।
भगवति तव संनिवासहेतो-
मणिमयमन्दिर मे तदर्पयामि ॥ ३ ॥
॥ देवीचतुःषष्ट्युपचारपूजास्तोत्रम् ॥
उषसि मागधमङ्गलगायनै-
र्झटिति जागृहि जागृहि जागृहि ।
अतिकृपाकटाक्षनिरीक्षणै-
जगदिदं जगदम्ब सुखीकुरु ॥ १ ॥
कनकमयवितर्दिशोभमानं
दिशि दिशि पूर्णसुवर्णकुम्भयुक्तम् ।
मणिमयमण्टपमध्य मे हि मात-
fe कृपयाशु समर्चनं ग्रहीतुम् ॥ २ ॥
कनककलशशोभमानशीर्ष
जलधरलम्बि समुल्लसत्पताकम् ।
भगवति तव संनिवासहेतो-
मणिमयमन्दिर मे तदर्पयामि ॥ ३ ॥