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शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ।
 
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वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य-
 

मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय ।

चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय
 

तस्मै वकाराय नमः शिवाय ॥ ४ ॥
 
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यक्षस्वरूपाय जटाधराय
 

पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
 

दिव्याय देवाय दिगम्बराय
 

तस्मै यकाराय नमः शिवाय ॥ ५ ॥
 
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इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य
 

श्रीगोविन्द भगवत्पूज्यपादशिष्यस्य
 

श्रीमच्छंकरभगवतः कृतौ
 

शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रं संपूर्णम् ॥
 
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