2026-02-23 00:39:34 by akprasad
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<ignore>गणेश भुजंगम् ।
</ignore>
<verse>विचित्रस्फुरद्रत्नमाला किरीटं
किरीटोल्लसच्चन्द्ररेखाविभूषम् ।
विभूषैकभूषं भवध्वंसहेतुं
गणाधीशमीशानसूनुं तमीडे ॥ ४ ॥
</verse>
<verse>उदञ्चद्भुजावल्लरीदृश्यमूलो-
ञ्
च्चलद्भूभ्रूलताविभ्रमभ्राजदक्षम् ।
मरुत्सुन्दरीचामरैः सेव्यमानं
गणाधीशमीशानसूनुं तमीडे ॥ ५ ॥
</verse>
<verse>स्फुरन्निष्ठुरालोलपिङ्गाक्षितारं
कृपाको मलोदारलीलावतारम् ।
कलाबिन्दुगं गीयते योगिवर्यै-
र्गणाधीशमीशानसूनुं तमीडे ॥ ६ ॥
</verse>
<verse>यमेकाक्षरं निर्मलं निर्विकल्पं
गुणातीतमानन्दमाकारशून्यम् ।
परं पारमोंकारमाम्नानायगर्भ
भं
वदन्ति प्रगल्भं पुराणं तमीडे ॥ ७ ॥
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<ignore>गणेश
<verse>विचित्रस्फुरद्रत्नमाला
किरीटोल्लसच्चन्द्ररेखाविभूषम् ।
विभूषैकभूषं भवध्वंसहेतुं
गणाधीशमीशानसूनुं तमीडे ॥ ४ ॥
<verse>उदञ्चद्भुजावल्लरीदृश्यमूलो-
ञ्
च्चलद्
मरुत्सुन्दरीचामरैः सेव्यमानं
गणाधीशमीशानसूनुं तमीडे ॥ ५ ॥
<verse>स्फुरन्निष्ठुरालोलपिङ्गाक्षितारं
कृपाको
कलाबिन्दुगं गीयते योगिवर्यै-
र्गणाधीशमीशानसूनुं तमीडे ॥ ६ ॥
<verse>यमेकाक्षरं निर्मलं निर्विकल्पं
गुणातीतमानन्दमाकारशून्यम् ।
परं पारमोंकार
वदन्ति प्रगल्भं पुराणं तमीडे ॥ ७ ॥
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