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सुवर्णमालास्तुतिः ।
 
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हाहाहूहूमुखसुरगायक-

गीतापदानपद्य विभो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ४८ ॥
 
ला
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<verse>ळा
दिर्न हि प्रयोगस्तदन्त-
 

मिह मङ्गळं सदास्तु विभो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ४९ ॥
 
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क्षणमिव दिवसान्नेष्यति त्वत्पद-

सेवाक्षणोत्सुकः शिव भो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ५० ॥
 
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इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य
 

श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य
 

श्रीमच्छंकरभगवतः कृतौ
 

सुवर्णमालास्तुतिः संपूर्णा ॥
 
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९१
 
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