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९०
 
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सुवर्णमालास्तुतिः ।
 
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वसुधातद्धरतच्छयरथमौ-
 

र्वी
शर पराकृतासुर
 
भो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ४४ ॥
 
or
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<verse>शर्व
देव सर्वोत्तम सर्वद
 

दुर्वृत्तगर्वहरण विभो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ४५ ॥
 
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षड्रिपुषडूर्मिषडिड्विकारहर
 

सन्मुख षण्मुखजनक विभो ।

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ४६ ॥
 
</verse>
<verse>
सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्मे-
 

त्येतल्लक्षणलक्षित भो ।
 
1
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ४७ ॥
 
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