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सुवर्णमालास्तुतिः ।
 
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महिमा तव न हि माति श्रुतिषु हि -

मानीधरात्मजाधव भो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ४० ॥
 
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यमनियमादिभिरङ्गैर्य मिनो
 

हृदये भजन्ति स त्वं भो ।

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ४१ ॥
 
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रज्जावहिरिव शुक्तौ रजतमि-
 

व त्वयि जगन्ति भान्ति विभो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ४२ ॥
 
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लब्ध्वा भवत्प्रसादाच्चक्रं
 

विधुरवति लोकमखिलं भो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ४३ ॥
 
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